मध्यप्रदेश की कृषि- Mppsc

कृषि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। 🔺 राज्य की 74.73% आबादी गांव में रहती है जो खेती करती है। 🔻राज्य की लगभग 49% जमीन खेती करने योग्य है। 🔺चम्बल, मालवा का पठार, रीवा पन्ना का पठार आदि कृषि योग्य भूमि है। 🔻मध्य प्रदेश को 11 कृषि जलवायु क्षेत्रो में विभाजित किया गया है।पढ़ना जारी रखें “मध्यप्रदेश की कृषि- Mppsc”

नर्मदा सोन घाटी – मध्यप्रदेश

नर्मदा सोन घाटी- 🔺यह मध्य प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा भौगोलिक प्रदेश है। 🔺इसका कुल क्षेत्रफल 86000 वर्गकिलोमीटर है जो कि मध्य प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का 26 % है। स्थिति- 🔺यह एक लंबी भ्रंश नदी घाटी है जो विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वतमालाओ के बीच में स्थित है। भुआकारिकी- 🔺इसका पश्चिमी भाग दक्कन ट्रेप (बेसाल्ट)पढ़ना जारी रखें “नर्मदा सोन घाटी – मध्यप्रदेश”

मालवा का पठार- मध्यप्रदेश

🔶मालवा का पठार मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा भू-भाग है यह मध्यप्रदेश के कुल क्षेत्रफल का 28% भाग कवर करता है। 🔶यह दक्कन ट्रेप (बेसाल्ट) की चट्टानों द्वारा निर्मित है। 🔶मालवा का पठार mp के पश्चिमी भाग में फैला हुआ है। 🔶मालवा के पठार का कुल क्षेत्रफल 88,222 वर्ग किलोमीटर है। 🔶कर्क रेखा मालवा के पठारपढ़ना जारी रखें “मालवा का पठार- मध्यप्रदेश”

मध्यप्रदेश का भौगोलिक विभाजन

मध्यप्रदेश भारत के प्रायद्वीपीय पठार का उत्तरी एवं मध्य भाग है। जलवायु, स्थिति, मिट्टी, खनिज, वनस्पति के आधार पर मध्य प्रदेश को मुख्य रूप से 3 भागो में बांटा गया है____ 1.मध्य उच्च भूमि A.मध्य भारत का पठार B.मालवा का पठार C.बुन्देलखण्ड का पठार D.रीवा-पन्ना का पठार E.नर्मदा-सोन घाटी 2.सतपुड़ा मैकाल श्रेणी 3.पूर्वी पठार(बघेलखण्ड कापढ़ना जारी रखें “मध्यप्रदेश का भौगोलिक विभाजन”

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