कृषि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है।
🔺 राज्य की 74.73% आबादी गांव में रहती है जो खेती करती है।
🔻राज्य की लगभग 49% जमीन खेती करने योग्य है।
🔺चम्बल, मालवा का पठार, रीवा पन्ना का पठार आदि कृषि योग्य भूमि है।
🔻मध्य प्रदेश को 11 कृषि जलवायु क्षेत्रो में विभाजित किया गया है।
मध्यप्रदेश में कृषि संबंधी संस्थाएं-
🔹राज्य भंडार गृह निगम – 1958 में
🔹मध्यप्रदेश बीज तथा फार्म विकास निगम – 1980 में ,भोपाल
🔹भारत की प्रथम जैविक खेती इकाई – इंदौर
🔹कृषि अभ्यांत्रिकी अनुसंधान केंद्र – भोपाल
🔹कृषि अभ्यांत्रिकी महाविद्यालय – जबलपुर
🔹जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय – जबलपुर 1964
🔹एक मात्र उद्यानिकी महाविद्यालय – मन्दसौर
प्रमुख फसलो के अनुसन्धान केंद्र-
🔸राष्ट्रिय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र – इंदौर
🔸राष्ट्रिय अंगूर अनुसन्धान केंद्र – रतलाम(प्रस्तावित)
🔸अन्तराष्ट्रीय मक्का अनुसन्धान केंद्र या नॉर्मन बोरलॉग संसथान – खमरिया(जबलपुर)
🔸दलहन अनुसन्धान केंद्र – अमलाहा(सीहोर) प्रस्तावित
🔸कृषि का अन्तराष्ट्रीय रिसर्च सेंटर- अमलाहा(सीहोर)
🔸गन्ना अनुसन्धान केंद्र – बोहानी(नरसिंहपुर)
🔸धान अनुसंधान केंद्र – बड़वानी
🔸गेँहू अनुसंधान केंद्र – पवारखेड़ा(होशंगाबाद)
🔸तुलसी शोध संस्थान- चित्रकूट(सतना)
फसले-
सोयाबीन- सोयाबीन mp की प्रमुख व्यापारिक फसल है। सोयाबीन सबसे ज्यादा उज्जैन जिले में बोई जाती है लेकिन इसकी शुरुआत देवास से हुई थी। यह सर्वप्रथम अमेरिका से आई थी।
👉सोयाबीन सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में होता है इसलिए मध्यप्रदेश को सोया स्टेट भी कहते हैं।
गेँहू- मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा गेँहू का उत्पादन होता है।
👉सबसे ज्यादा गेँहू होशंगाबाद जिले में होता है।
👉सीहोर को गेँहू की डलिया कहा जाता है।
चना- सबसे ज्यादा विदिशा में उत्पादन होता है लगभग 52%
चावल- पूर्वी क्षेत्र में, जहाँ 100cm. से अधिक बारिश होती हैं।
मक्का- दक्षिण मध्य mp में
👉छिंदवाड़ा को मक्का जिला घोषित किया गया है।
अफीम- मध्यप्रदेश के मंदसोर जिले में अफीम की खेती की जाती हैं।
गांजा- खण्डवा में
सरसों- उत्तरी मध्य प्रदेश में
👉मध्य भारत के पठार को सरसों की हंडिया कहते है।








